193/2026, बाल कहानी- 03 नवम्बर

l#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 193/2026
*03 नवम्बर 2026 ( मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #पिंकी_की_दयालुता
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एक बार की बात है, अमरौधा गाँव में पिंकी नाम की एक छोटी सी बच्ची रहती थी।
वह गाँव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा थी। पिंकी दिल की बहुत साफ, दयालु और चंचल थी। उसे पेड़-पौधों, पक्षियों और जानवरों से बहुत प्रेम था। वह जब भी स्कूल से घर लौटती, रास्ते में दिखने वाले बेजुबान जीवों के लिए अपने बस्ते में हमेशा कुछ न कुछ खाने के लिए जरूर रखती थी।
उस साल सर्दी के दिन कुछ ज्यादा ही ठण्डे थे। सुबह-सुबह गलन भरी हवा चल रही थी और कोहरा छाया हुआ था। पिंकी जब अपना बस्ता सँभालकर स्कूल के लिए निकली तो रास्ते में एक पुरानी दीवार के पास से उसे धीमे-धीमे रोने की आवाज सुनाई दी। उसने रुककर ध्यान से देखा, तो वहाँ ठण्ड से ठिठुरता हुआ एक छोटा-सा भूरा पिल्ला दुबक कर बैठा हुआ था।
पिल्ले की एक टाँग में चोट लगी थी और वह ठण्ड और दर्द के मारे बुरी तरह काँप रहा था। पिंकी से उसकी यह हालत देखी नहीं गई। वह अपना स्कूल बैग एक तरफ रखकर तुरन्त उस पिल्ले के पास बैठ गयी। उसने अपने मफलर को उतारकर प्यार से उस पिल्ले के चारों तरफ लपेट दिया ताकि उसे थोड़ी गर्माहट मिल सके।
पिंकी ने पिल्ले को अपनी गोद में उठाया और दौड़कर वापस अपने घर पहुँची। उसने अपनी माँ को आवाज़ दी, "माँ!.. माँ!.. जल्दी आओ! इसे देखो, यह बेचारा ठण्ड से कितना काँप रहा है.. इसकी टाँग में चोट भी लगी है।"
पिंकी की माँ का दिल भी बहुत कोमल था। उन्होंने तुरन्त एक साफ पुराना कपड़ा लाकर पिल्ले को पोंछा और उसके पास अलाव के पास बिठाया। इसके बाद, उन्होंने उसकी टाँग पर हल्दी और दूध का लेप लगाया ताकि उसका दर्द कम हो सके। पिंकी ने अपने हिस्से का थोड़ा-सा गुनगुना दूध कटोरी में भरकर प्यार से उस पिल्ले को पिलाया।
कुछ ही घण्टों की देखभाल और गर्माहट पाकर पिल्ले की जान में जान आई। उसने अपनी आँखें खोलीं और अपनी पूँछ हिलाकर पिंकी को देखा, मानो वह उसे 'धन्यवाद' कह रहा हो। पिंकी ने प्यार से उसका नाम 'टॉमी' रख दिया।
शाम को जब पिंकी स्कूल से लौटी तो टॉमी गेट पर ही उसका इन्तजार कर रहा था। वह खुशी से उछल-कूद करने लगा। उस दिन के बाद से टॉमी पिंकी का पक्का दोस्त बन गया। वह रोज पिंकी को स्कूल छोड़ने दूर तक जाता और शाम को उसके लौटने का इन्तजार करता।

#संस्कार_सन्देश -
हमें हमेशा बेजुबान जानवरों और जरूरतमन्दों के प्रति दया भाव रखना चाहिए। हमारी छोटी सी दया और मदद किसी बेजान या बेसहारा जिन्दगी को नया जीवन दे सकती है।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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