सन्त रविदास

भारत देश साधु संतों की धरती मानी जाती है,

उसमें एक से एक हस्ती उभर कर आती है।

वाराणसी के सीर गोवर्धन में रविदास ने जन्म लिया,

1450 से 1520 तक इस धरा पर जीवन जिया।।


पिता राघव दास माता करमा बाई है,

पत्नी लोना पुत्र विजय ने पहचान पिता से पाई है।

बचपन में ज्ञान प्राप्त कर सन्त उपाधि पाई है,

समाज सुधार और अध्यात्मिकता अलख जगाई है।।


भक्ति से प्रभावित होकर मीरा ने गुरु मान लिया,

श्रृंगार रस की रचना कर कृष्ण प्रेम को जान लिया।

सच्चाई और मानवता को देख गुरु ग्रंथ में शामिल किया,

सत्यता, कर्त्तव्यनिष्ठ पर अपना नाम अमर किया।।


कोटि-कोटि नमन सन्त रविदास को करती हूँ,

उनके भक्ति रस के गीत रोज सुना करती हूॅं।

सन्त रविदास जी ने मन को पवित्र माना है,

मन चंगा कठौती में गंगा माना है।।


रचनाकार

ऊषा रानी,

सहायक अध्यापक,

कम्पोजिट विद्यालय खाता,

विकास क्षेत्र- मवाना, 

जनपद-मेरठ।



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