164/2025, बाल कहानी- 04 अक्टूबर
बाल कहानी - बब्लू और डब्लू
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जीवन में उत्सव का बहुत महत्व है। एक गाँव की बात है, बब्लू और डब्लू दो भाई अपने मामा जी के साथ दूसरे गाँव दशहरा मेला देखने गए थे। मेला पहुँचकर मामा जी ने दोनों भाई को झूला झूलाया और नास्ता वगैरह कराया, फिर मेला में घूमने लगे। मेला में लोगों की बहुत भीड़ लगी हुई थी और मेले में बहुत सारे होटल और कई प्रकार की दूकान तथा बहुत सारे खिलौने के दूकान लगे हुए थे। बब्लू-डब्लू खिलौने लेना चाह रहे थे। वे अपने मामा जी से बोले, मामा जी! मुझे खिलौना लेना है।" मामा जी ने कहा, "जाने से पहले लेंगे।" वे तीनों फिर मेले में घूमने लगे। बब्लू ने एक बहुत सुन्दर खिलौना देखा। उसने डब्लू को बुलाया और दोनों भाई उस खिलौने के पास दौड़कर चले गये। तभी अचानक मेले में एक बैल घुस गया, जिससे मेले में भगदड़ मच गई। मेले में उनके मामा जी और दोनों भाई बिछुड़ गये। मामा जी से दोनों भाई अलग हो गये। उनका खुशियों का उत्सव गम में बदल गया। दोनों भाई इधर-उधर मामा को खोजने लगे। उनके मामा जी भी उधर दोनों भाई को खोज-खोज कर परेशान हो रहे थे। इधर रंग-बिरंगे कई प्रकार के खिलौने उन दोनों भाईयों को आकर्षित कर रहे थे। पर बेचारे क्या करते? मामा जी बिछुड़ गये थे। अब वे दोनों बहुत मायूस हो गये थे। बहुत समय हो जाने के बाद अचानक उनके मामा जी उनको वहीं मिल गये। दोनों भाई मामा के मिलने पर बहुत खुश हुए। उनके मामा जी ने उनको फिर मेले में घूमाया और अनेक प्रकार के व्यंजन खिलाए। फिर अन्त में दोनों भाई बब्लू और डब्लू के लिए मनचाहा खिलौने खरीदा। दोनों भाई बहुत खुश हुए। उन दोनों भाईयों ने दशहरे उत्सव का बहुत आनन्द लिया और खुशी-खुशी घर आये। घर आकर दोनों भाईयों ने अपने दोस्तों को दशहरा उत्सव के बारे में बताया और सबको खिलौने दिखाये उत्सव का आनन्द सच में बहुत खुशियों भरा होता है।
#संस्कार_सन्देश-
मेले में बच्चों को किसी आकर्षक वस्तु को देखकर तथा अपने परिवार के लोगों को छोड़कर तुरन्त दौड़कर कहीं नहीं जाना चाहिए, क्योंकि मेले में खो जाने का खतरा रहता है।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०शि०)
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बुढ़नपुर,
विकासखण्ड व जिला- सक्ती, छत्तीसगढ़
✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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