166/2025, बाल कहानी- 08 अक्टूबर
बाल कहानी - बाज की चतुराई
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एक पुराने पेड़ पर दो चील रहा करती थीं। दोनों में गहरी दोस्ती थी। एक दिन वहाँ पर कहीं से एक बाज उड़ कर आया। शाम हो गई थी। इसने सोचा, "क्यों न इस पेड़ पर आराम कर लिया जाए।" दोनों चील दोस्तों ने उस बाज को देखा, "उनमें से एक ने कहा, "अरे भाई! तुम कौन हो और यहाँ पर क्या कर रहे हो?"
बाज ने उत्तर दिया, "मैं यहाँ पर आज रात आराम करना चाहता हूँ। कल सुबह होते ही मैं यहाँ से चला जाऊँगा।"
यह बात सुनकर दोनों चील मित्र आपस में सोचने लगीं," पता नहीं कौन है...कैसा है? हमें रात में इसे रुकने से मना करना चाहिए। हमें अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।"
एक चील ने बाज से कहा, "आप किसी और पेड़ पर आराम कर लीजिए तो उचित रहेगा!" इस पर बाज क्रोधित हो गया हो गया। बाज ने एक उपाय सोचा। वह बोला, "कल तुम्हारी यह चील मित्र मुझे एक पेड़ पर मिला था और तुम्हारे बारे में कह रहा था कि तुम बहुत ही चालाक हो और सदा उसे लड़ते रहते हो तुम्हारे बारे में बहुत उल्टट-सीधी बोल रही थी।" यह बात सुनकर चील एकदम अपना आपा खो बैठी
और जाकर अपने मित्र से लड़ने लगी। उसका चील मित्र उसे समझाता रहा कि, "ऐसा कुछ नहीं है, वह बाज झूठ बोल रहा है।" पर चील रात भर अपने मित्र से लड़ता रही। इधर सवेरा हो गया और बाज मजे से रात कट कर उड़ गया। जब सवेरे दोनों चीलों ने उस बाज को नहीं देखा, तब उनकी समझ में आ गया कि उनके साथ में छल किया गया है। जिस चील ने बाज से बात की थी, उसे अपने ऊपर बहुत पछतावा हो रहा था कि उसने अपने मित्र की बात नहीं मानी। उसने अपने मित्र से माफी माँगी और दोबारा किसी और की कही बातों में न आने की ठानी। जब तक की उसकी सच्चाई सामने ना आए। दोनों मित्र एक-दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए और खाना ढूँढने के लिए जंगल की तरफ निकल पड़े.....!
#संस्कार_सन्देश -
'फूट डालो और राज करो' इससे बचें और किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए।"
कहानीकार-
शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय न० कूँड करहल, मैनपुरी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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