पानीपत द्वितीय युद्ध

पाँच नवम्बर पन्द्रह सौ छप्पन,

पानीपत स्थान।

हेमू-अकबर बीच हुआ था,

द्वितीय युद्ध घमासान।।


आदिलशाह सूर सुल्तान,

जो बादशाह अफगान।

उसका हिन्दू सेनापति,

हेमचन्द्र विक्रमादित्य।।


हेमू की सेना थी विशाल,

हासिल युद्धकला में कमाल।

किन्तु समय जब हो विपरीत,

उससे सके न कोई जीत।।


राजा क्षण में बने फकीर,

हेमू की आँख में घुस गया तीर।

जीता युद्ध गए वो हार,

समय चक्र ने किया प्रहार।।


तीर लगा तो हुए बेहोश,

तन का रहा न कोई होश।

रणभूमि से सेना भागी,

अकबर की ज्यों किस्मत जागी।।


कैदी उनको गया बनाया,

अकबर के समक्ष गया लाया।

नेत्र वेदना से जो तड़पे,

उसका शीश उतारा धड़ से।।


बेहोशी में जो ले प्राण,

कैसे बने सम्राट महान?

ये भी युद्ध रहा निर्णायक,

सोचो! कौन है युद्ब का नायक?


रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,

(स्टेट अवार्डी टीचर)

पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

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