घाघरा का युद्ध

छः मई पन्द्रह उनतीस,

अफगानों-बाबर के बीच।

नदी घाघरा बहे बिहार,

जिसके तट पे हुआ संहार।।


फर्मुली, नुहानी सरदार,

अफगानों के थे सरदार।

बाबर के थे बड़े विरोधी,

संग में जिनके महमूद लोदी।।


शमसाबाद, अवध, कन्नौज,

अफगानों ने किया विद्रोह।

तीनों जगह पे कर लिया कब्ज़ा,

बाबर चन्देरी युद्ध में उलझा।।


बिहार का शासक नुसरतशाह,

अफगानों को दिया सहाय।

बढ़ा रहा था खूब हौसला,

फतह करो आगरा का किला।।


चन्देरी का दुर्ग फतह कर,

बढ़ा अवध की ओर है बाबर,

बाबर के आने का शोर,

बिब्बन भगा बंगाल की ओर।।


महमूद लोदी, नुसरत शाह,

रहे संगठित सैन्य सजाय।

कैसे युद्ब में बाबर हारे,

सोच रहे थे नए उपाय।।


अफगानों ने घेर चुनार,

दिया था बाबर को ललकार।

बाबर बढ़ा बिहार की ओर,

अफगान भागे छोड़ चुनार।।


घाघरा के युद्ब में,

हार गए अफगानी।

बाबर एकछत्र राज्य का,

फिर बन गया था स्वामी।।


लोदी ने बंगाल में शरण ली, 

नुसरतशाह ने सन्धि कर ली।

बिहार राज्य का हुआ बँटवारा,

बाबर की अधीनता स्वीकारा।।


रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,

(स्टेट अवार्डी टीचर)

पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

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